श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.105.8 
एतच्चैवाहमर्हामि भूयश्च बलवृत्रहन्।
त्रैलोकस्येश्वरो योऽहं परभृत्यत्वमागत:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे बल और वृत्रासुर को मारने वाले देवताओं के राजा! मैं इस व्यवहार का अधिकारी हूँ, क्योंकि तीनों लोकों पर शासन करने में समर्थ होते हुए भी मैंने दूसरे की सेवा स्वीकार की है॥8॥
 
O king of the gods, who killed Bala and Vritraasura! I deserve this treatment because even though I am capable of ruling the three worlds, I have accepted the service of someone else. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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