श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.105.4 
निसर्गात् सर्वभूतानां सर्वभूतेश्वरेण मे।
आहारो विहितो धात्रा किमर्थं वार्यते त्वया॥ ४॥
 
 
अनुवाद
समस्त प्राणियों के स्वामी भगवान ने समस्त प्राणियों की रचना करते समय मेरा आहार निश्चित किया था, फिर तुम उसमें विघ्न क्यों डालते हो?॥4॥
 
The Creator, the master of all living beings, had decided my diet while creating all living beings. Then why do you create obstacles in it?॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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