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mahabharat 5.105.32: राजन! इस प्रकार भगवान विष्णु के तेज से अभिभूत होकर महाबली विनतानन्दन गरुड़ ने अपना अहंकार त्याग दिया॥32॥   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.32 
एवं विष्णुबलाक्रान्तो गर्वनाशमुपागत:।
गरुडो बलवान् राजन् वैनतेयो महायशा:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
राजन! इस प्रकार भगवान विष्णु के तेज से अभिभूत होकर महाबली विनतानन्दन गरुड़ ने अपना अहंकार त्याग दिया॥32॥
 
Rajan! In this way, the mighty Vintanandan Garuda, overpowered by the power of Lord Vishnu, left his ego behind. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)