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mahabharat 5.105.29: विभु! मुझे आपके महान बल का ज्ञान नहीं था। देव! इसीलिए मैंने अपने बल और पराक्रम को दूसरों के बराबर ही नहीं, बल्कि उनसे कहीं अधिक समझा।'   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.29 
न हि ज्ञातं बलं देव मया ते परमं विभो।
तेन मन्ये ह्यहं वीर्यमात्मनो न समं परै:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
विभु! मुझे आपके महान बल का ज्ञान नहीं था। देव! इसीलिए मैंने अपने बल और पराक्रम को दूसरों के बराबर ही नहीं, बल्कि उनसे कहीं अधिक समझा।'
 
‘Vibhu! I was not aware of your great strength. Dev! That is why I considered my strength and valour not only equal to others, but much more than them.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)