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mahabharat 5.105.26: तत्पश्चात, पक्षीराज और विनता के पुत्र गरुड़जी मूर्छित और व्याकुल हो गए और भगवान विष्णु के चरणों में प्रणाम करके दयनीय स्वर में कुछ कहने लगे-॥26॥   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.26 
स विष्णुं शिरसा पक्षी प्रणम्य विनतासुत:।
विचेता विह्वलो दीन: किंचिद् वचनमब्रवीत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात, पक्षीराज और विनता के पुत्र गरुड़जी मूर्छित और व्याकुल हो गए और भगवान विष्णु के चरणों में प्रणाम करके दयनीय स्वर में कुछ कहने लगे-॥26॥
 
Thereafter, Garuda, the king of birds and son of Vinata, became unconscious and distraught and bowed down at the feet of Lord Vishnu and said something in a pitiful tone -॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)