श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.105.24 
न त्वेनं पीडयामास बलेन बलवत्तर:।
ततो हि जीवितं तस्य न व्यनीनशदच्युत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अत्यन्त बलशाली भगवान अच्युत ने गरुड़ को बल से दबाया नहीं; इसी कारण उसके प्राण नष्ट नहीं हुए ॥24॥
 
The extremely powerful Lord Achyuta did not suppress Garuda by force; That is why his life was not destroyed. 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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