श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.105.22 
तत: स भगवांस्तस्य स्कन्धे बाहुं समासजत्।
निपपात स भारार्तो विह्वलो नष्टचेतन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर भगवान विष्णु ने अपनी दाहिनी भुजा गरुड़ के कंधे पर रख दी। गरुड़ भुजा के भार से पीड़ित और व्याकुल होकर गिर पड़े। उनकी चेतना भी लुप्त हो गई॥22॥
 
Having said this, Lord Vishnu placed his right arm on Garuda's shoulder. Garuda fell down, pained and distressed by the weight of the arm. His consciousness also vanished.॥22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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