श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.105.11 
असह्यं सर्वभूतानां ममापि विपुलं बलम्।
मयापि सुमहत् कर्म कृतं दैतेयविग्रहे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मुझमें भी ऐसी अपार शक्ति है कि समस्त प्राणी मिलकर भी उसका सामना नहीं कर सकते। जब दैत्यों के साथ युद्ध हुआ था, तब मैंने भी महान पराक्रम दिखाया था॥11॥
 
I too possess such immense power that all the creatures put together cannot withstand it. I too have displayed great valour when a war broke out with the demons.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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