श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.104.8 
यथा विष्णुकुले लक्ष्मीर्यथा स्वाहा विभावसो:।
कुले तव तथैवास्तु गुणकेशी सुमध्यमा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार लक्ष्मी भगवान विष्णु के घर में और स्वाहा अग्नि के घर में शोभायमान रहती हैं, उसी प्रकार सुन्दर गुणकेशी आपके परिवार में प्रतिष्ठित हों। 8॥
 
Just as Lakshmi graces the house of Lord Vishnu and Swaha graces the house of Agni, in the same way, may the beautiful Gunakeshi be revered in your family. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)