श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 103: नागलोकके नागोंका वर्णन और मातलिका नागकुमार सुमुखके साथ अपनी कन्याको ब्याहनेका निश्चय  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.103.3 
श्वेताचलनिभाकारो दिव्याभरणभूषित:।
सहस्रं धारयन् मूर्ध्ना ज्वालाजिह्वो महाबल:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भगवान शेष का शरीर कैलाश पर्वत के समान श्वेत है। उनके सहस्र सिर हैं। उनकी जिह्वा अग्नि की ज्वाला के समान है। वे अनंत दिव्य आभूषणों से सुशोभित हैं॥3॥
 
Lord Shesh's body is as white as Mount Kailash. He has a thousand heads. His tongue appears like a flame of fire. This mighty being is adorned with infinite divine ornaments.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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