श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 103: नागलोकके नागोंका वर्णन और मातलिका नागकुमार सुमुखके साथ अपनी कन्याको ब्याहनेका निश्चय  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.103.23 
नारद उवाच
ऐरावतकुले जात: सुमुखो नाम नागराट्।
आर्यकस्य मत: पौत्रो दौहित्रो वामनस्य च॥ २३॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले- माता! यह नागराज सुमुख हैं, जो ऐरावत वंश में उत्पन्न हुए हैं। ये आर्यक के पौत्र और वामन के प्रपौत्र हैं।
 
Naradji said- Mother! This is King of Snakes Sumukh, who was born in the clan of Airavat. He is the grandson of Aryaka and the great-grandson of Vaman.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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