श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 103: नागलोकके नागोंका वर्णन और मातलिका नागकुमार सुमुखके साथ अपनी कन्याको ब्याहनेका निश्चय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.103.1 
नारद उवाच
इयं भोगवती नाम पुरी वासुकिपालिता।
यादृशी देवराजस्य पुरीवर्यामरावती॥ १॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले- मातले! यह उनकी भोगवती नामक नगरी है, जो नागराज वासुकि द्वारा रक्षित है। देवराज इन्द्र की श्रेष्ठ अमरावती नगरी के समान यह भी सुख-समृद्धि से परिपूर्ण है॥ 1॥
 
Naradji said— Matale! This is his city named Bhogavati, which is protected by Nagraj Vasuki. Just like Devraj Indra's best city Amaravati, this too is full of happiness and prosperity.॥ 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd