vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना
»
श्लोक 48
श्लोक
5.10.48
संक्षोभश्चापि सत्त्वानामनावृष्टिकृतोऽभवत्।
देवाश्चापि भृशं त्रस्तास्तथा सर्वे महर्षय:॥ ४८॥
अनुवाद
वर्षा न होने से समस्त प्राणी व्याकुल हो गए। देवता और समस्त ऋषिगण भी अत्यन्त भयभीत हो गए ॥48॥
All living beings were agitated due to the lack of rain. The gods and all the sages too became very frightened. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×