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mahabharat 5.10.42: शत्रुओं को मारकर इन्द्र आदि देवताओं के हृदय हर्ष से भर गए, समस्त प्राणियों ने उन्हें प्रणाम किया और उन्होंने सबको सान्त्वना दी ॥42॥   |   mahabharat अध्याय 5.10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.10.42 
नमस्कृत: सर्वभूतै: सर्वभूतान्यसान्त्वयत्।
हत्वा शत्रुं प्रहृष्टात्मा वासव: सह दैवतै:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं को मारकर इन्द्र आदि देवताओं के हृदय हर्ष से भर गए, समस्त प्राणियों ने उन्हें प्रणाम किया और उन्होंने सबको सान्त्वना दी ॥42॥
 
Having killed the enemy, the hearts of Indra and the gods were filled with joy. All beings saluted him and he consoled them all. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)