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mahabharat 5.10.33: देवराज इंद्र सदैव वृत्रासुर को मारने का अवसर ढूँढ़ते रहते थे। एक दिन उन्होंने समुद्र तट पर उस महादैत्य को देखा।   |   mahabharat अध्याय 5.10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.10.33 
छिद्रान्वेषी समुद्विग्न: सदा वसति देवराट्।
स कदाचित् समुद्रान्ते समपश्यन्महासुरम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
देवराज इंद्र सदैव वृत्रासुर को मारने का अवसर ढूँढ़ते रहते थे। एक दिन उन्होंने समुद्र तट पर उस महादैत्य को देखा।
 
Devraj Indra was always anxious looking for a loophole (an opportunity to kill Vritraasura). One day he saw that great demon on the seashore.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)