श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.10.19 
पीडॺन्ते च प्रजा: सर्वा: सदेवासुरमानुषा:।
सख्यं भवतु ते वृत्र शक्रेण सह नित्यदा॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इस युद्ध से देवता, दानव और मनुष्य आदि सभी लोग दुःखी हो रहे हैं। अतः हे वृत्रासुर! हम चाहते हैं कि इन्द्र के साथ तुम्हारी सदैव मित्रता बनी रहे।॥19॥
 
‘All the people including gods, demons and humans are suffering due to this war. Therefore, Vritrasura! We want that you should be friends with Indra forever.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)