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mahabharat 5.10.13: हे देवेश्वरगण! आप सब ऋषियों और गन्धर्वों के साथ जाकर वृत्रासुर और इन्द्र के बीच संधि करा दीजिए। इसमें विलम्ब न कीजिए॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.10.13 
गच्छध्वमृषिभि: सार्धं गन्धर्वैश्च सुरोत्तमा:।
वृत्रस्य सह शक्रेण सन्धिं कुरुत मा चिरम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे देवेश्वरगण! आप सब ऋषियों और गन्धर्वों के साथ जाकर वृत्रासुर और इन्द्र के बीच संधि करा दीजिए। इसमें विलम्ब न कीजिए॥13॥
 
O Deveshwargan! You all go with the sages and Gandharvas and make a treaty between Vritrasura and Indra. Do not delay in this.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)