श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.10.1 
इन्द्र उवाच
सर्वं व्याप्तमिदं देवा वृत्रेण जगदव्ययम्।
न ह्यस्य सदृशं किंचित् प्रतिघाताय यद् भवेत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र बोले - हे देवताओं! वृत्रासुर ने इस सम्पूर्ण जगत पर आक्रमण कर दिया है। उसे नष्ट करने में समर्थ कोई अस्त्र नहीं है॥1॥
 
Indra said - O Gods! Vritraasura has attacked this entire world. There is no weapon capable of destroying him.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)