श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 1: राजा विराटकी सभामें भगवान‍् श्रीकृष्णका भाषण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.1.16 
मिथ्योपचारेण यथा ह्यनेन
कृच्छ्रं महत् प्राप्तमसह्यरूपम्।
न चापि पार्थो विजितो रणे तै:
स्वतेजसा धृतराष्ट्रस्य पुत्रै:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कौरवों के इस छल और कपट के कारण पाण्डवों को कितना महान् और असह्य दुःख भोगना पड़ा, यह बात आपसे छिपी नहीं है। उन धृतराष्ट्रपुत्रों ने अपने बल और पराक्रम से कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर को किसी भी युद्ध में नहीं हराया (उन्होंने छल से ही उसका राज्य छीन लिया)।॥16॥
 
It is not hidden from you how much great and unbearable suffering the Pandavas had to undergo due to this deceit and fraud of the Kauravas. Those sons of Dhritarashtra did not defeat Kunti's son Yudhishthira in any war with their strength and valour (they snatched his kingdom only by deceit).॥16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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