श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 1: राजा विराटकी सभामें भगवान‍् श्रीकृष्णका भाषण  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.1.12 
त्रयोदशश्चैव सुदुस्तरोऽय-
मज्ञायमानैर्भवतां समीपे।
क्लेशानसह्यान् विविधान् सहद्भि-
र्महात्मभिश्चापि वने निविष्टम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह तेरहवाँ वर्ष व्यतीत करना अत्यन्त कठिन था, फिर भी इन महात्माओं ने आपके समीप अज्ञातवास करते हुए नाना प्रकार के असह्य कष्ट सहते हुए यह वर्ष व्यतीत किया। इसके अतिरिक्त वे बारह वर्षों तक वन में भी रहे॥ 12॥
 
It was very difficult to pass this thirteenth year, but these great souls spent this year living anonymously near you, enduring various kinds of unbearable sufferings. Besides this, they also lived in the forest for twelve years.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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