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श्लोक 4.9.33  |
यो हि मां पुरुषो गृद्धॺेद् यथान्या: प्राकृता: स्त्रिय:।
तामेव निवसेद् रात्रिं प्रविश्य च परां तनुम्॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| परन्तु जो पुरुष मुझे किसी अन्य स्वाभाविक स्त्री के समान समझकर बलपूर्वक मुझे वश में करने का प्रयत्न करता है, वह उसी रात मर जाता है ॥33॥ |
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| But any man who thinks of me as any other natural woman and tries to possess me by force, dies in the same night. ॥ 33॥ |
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