श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 9: द्रौपदीका सैरन्ध्रीके वेशमें विराटके रनिवासमें जाकर रानी सुदेष्णासे वार्तालाप करना और वहाँ निवास पाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  4.9.33 
यो हि मां पुरुषो गृद्धॺेद् यथान्या: प्राकृता: स्त्रिय:।
तामेव निवसेद् रात्रिं प्रविश्य च परां तनुम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
परन्तु जो पुरुष मुझे किसी अन्य स्वाभाविक स्त्री के समान समझकर बलपूर्वक मुझे वश में करने का प्रयत्न करता है, वह उसी रात मर जाता है ॥33॥
 
But any man who thinks of me as any other natural woman and tries to possess me by force, dies in the same night. ॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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