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श्लोक 4.9.17  |
द्रौपद्युवाच
नास्मि देवी न गन्धर्वी नासुरी न च राक्षसी।
सैरन्ध्री तु भुजिष्यास्मि सत्यमेतद् ब्रवीमि ते॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| द्रौपदी बोली- महारानी! मैं न तो देवी हूँ, न गन्धर्व हूँ, न असुर की पत्नी हूँ, न राक्षसी हूँ। मैं तो सेविका सैरन्ध्री हूँ। मैं आपसे यह बात सच-सच कह रही हूँ॥ 17॥ |
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| Draupadi said— Queen! I am neither a goddess nor a Gandharva, nor am I the wife of an Asura, nor a demoness. I am a serving Sairandhri. I am telling you this truthfully.॥ 17॥ |
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