श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 9: द्रौपदीका सैरन्ध्रीके वेशमें विराटके रनिवासमें जाकर रानी सुदेष्णासे वार्तालाप करना और वहाँ निवास पाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.9.13 
शारदोत्पलपत्राक्ष्या शारदोत्पलगन्धया।
शारदोत्पलसेविन्या रूपेण सदृशी श्रिया॥ १३॥
 
 
अनुवाद
स्वरूप में आप उस देवी लक्ष्मी के समान हैं, जिनके नेत्र शरद ऋतु के खिले हुए कमल की पंखुड़ियों के समान बड़े हैं, जिनके शरीर से शरद ऋतु के कमलों की सुगंध निकलती है और जो शरद ऋतु के कमलों का सेवन करती हैं॥13॥
 
In form you are like that goddess Lakshmi whose eyes are large like the blooming lotus petals of autumn, whose body emanates the fragrance of the autumn lotus and who consumes the autumn lotuses.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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