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श्लोक 4.8.7  |
ततो विराटं समुपेत्य पाण्डव-
स्त्वदीनरूपं वचनं महामना:।
उवाच सूदोऽस्मि नरेन्द्र बल्लवो
भजस्व मां व्यञ्जनकारमुत्तमम्॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| तब महामनस्वी पाण्डवपुत्र भीम ने विराट के अत्यन्त समीप जाकर विनीत स्वर में कहा - 'नरेन्द्र! मैं रसोइया हूँ। मेरा नाम बल्लभ है। मैं बहुत स्वादिष्ट व्यंजन बनाता हूँ। कृपया मुझे इस कार्य हेतु अपने यहाँ रख लीजिए।' |
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| Then the great-minded Pandava son Bhima went very close to Virat and said in a humble voice - 'Narendra! I am a cook. My name is Ballava. I make very delicious dishes. Please keep me at your place for this work'. |
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