श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 72: अर्जुनका अपनी पुत्रवधूके रूपमें उत्तराको ग्रहण करना एवं अभिमन्यु और उत्तराका विवाह  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.72.9 
अभिमन्युर्महाबाहु: पुत्रो मम विशाम्पते।
जामाता तव युक्तो वै भर्ता च दुहितुस्तव॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मेरे महाबाहु पुत्र का नाम अभिमन्यु है। वह आपका योग्य दामाद और आपकी पुत्री के लिए उपयुक्त वर होगा।
 
Maharaj! The name of my mighty-armed son is Abhimanyu. He will be your worthy son-in-law and a suitable husband for your daughter.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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