श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 72: अर्जुनका अपनी पुत्रवधूके रूपमें उत्तराको ग्रहण करना एवं अभिमन्यु और उत्तराका विवाह  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.72.8 
स्वस्रीयो वासुदेवस्य साक्षाद् देवशिशुर्यथा।
दयितश्चक्रहस्तस्य सर्वास्त्रेषु च कोविद:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मेरा पुत्र देवकुमार (देवताओं का पुत्र) के समान है। वह स्वयं भगवान वासुदेव का भांजा है। वह चक्रधारी श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है। वह सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों में भी निपुण है। ॥8॥
 
My son is like a Devkumar (son of the Gods). He is the nephew of Lord Vasudeva himself. He is very dear to Chakradhari Shri Krishna. He is also skilled in all types of weapons. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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