श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 72: अर्जुनका अपनी पुत्रवधूके रूपमें उत्तराको ग्रहण करना एवं अभिमन्यु और उत्तराका विवाह  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.72.23 
इन्द्रसेनादयश्चैव रथैस्तै: सुसमाहितै:।
आययु: सहिता: सर्वे परिसंवत्सरोषिता:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रसेन आदि सारथी भी, जो एक वर्ष तक द्वारका में रहे थे, अपने रथों में आवश्यक वस्तुओं से सुसज्जित होकर वहाँ आये॥ 23॥
 
Charioteers like Indrasena, who had stayed at Dvaraka for a year, also came there with their chariots fully equipped with all the essential items.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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