श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 72: अर्जुनका अपनी पुत्रवधूके रूपमें उत्तराको ग्रहण करना एवं अभिमन्यु और उत्तराका विवाह  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.72.15 
अभिमन्युं च बीभत्सुरानिनाय जनार्दनम्।
आनर्तेभ्योऽपि दाशार्हानानयामास पाण्डव:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन अर्जुन ने आनर्तदेश से दशार्हवंश के अभिमन्यु, भगवान वासुदेव तथा उनके अन्य सम्बन्धियों को भी वहाँ बुला लिया। 15॥
 
Pandunandan Arjun also called Abhimanyu, Lord Vasudev and his other relatives of Dasharhavansh from Anartadesh there. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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