श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 72: अर्जुनका अपनी पुत्रवधूके रूपमें उत्तराको ग्रहण करना एवं अभिमन्यु और उत्तराका विवाह  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.72.14 
ततस्त्रयोदशे वर्षे निवृत्ते पञ्च पाण्डवा:।
उपप्लव्यं विराटस्य समपद्यन्त सर्वश:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पाँचों पाण्डवों का तेरहवाँ वर्ष पूरा हो चुका था, वे सब-के-सब राजा विराट के उपप्लव्य नामक नगर में आकर रहने लगे॥14॥
 
The thirteenth year of the five Pandavas had already been completed, all of them came and started living in the city of King Virat named Upaplavya. 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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