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श्लोक 4.72.13  |
ततो मित्रेषु सर्वेषु वासुदेवं च भारत।
प्रेषयामास कौन्तेयो विराटश्च महीपति:॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| जनमेजय! तत्पश्चात् कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर और राजा विराट ने अपने समस्त बन्धु-बान्धवों को तथा भगवान् वासुदेव को भी निमन्त्रण भेजा॥13॥ |
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| Janamejaya! Thereafter, Kuntinandan Yudhishthir and King Virat sent invitations to all their friends and relatives and also to Lord Vasudev. 13॥ |
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