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mahabharat 4.71.4-5: ये ही वे हैं जिन्होंने गंधमादन पर्वत पर क्रोधवश नामक दैत्यों का वध किया था और द्रौपदी के लिए दिव्य सुगन्धित कमल लाए थे। ये ही वे गंधर्व हैं जिन्होंने दुष्टबुद्धि कीचकों का वध किया था। ये ही वे हैं जिन्होंने आपके अन्तःकक्ष में बहुत से व्याघ्र, भालू और सूअरों को मारा था॥4-5॥   |   mahabharat अध्याय 4.71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  4.71.4-5 
एष क्रोधवशान् हत्वा पर्वते गन्धमादने।
सौगन्धिकानि दिव्यानि कृष्णार्थे समुपाहरत्॥ ४॥
गन्धर्व एष वै हन्ता कीचकानां दुरात्मनाम्।
व्याघ्रानृक्षान् वराहांश्च हतवान् स्त्रीपुरे तव॥ ५॥
 
 
अनुवाद
ये ही वे हैं जिन्होंने गंधमादन पर्वत पर क्रोधवश नामक दैत्यों का वध किया था और द्रौपदी के लिए दिव्य सुगन्धित कमल लाए थे। ये ही वे गंधर्व हैं जिन्होंने दुष्टबुद्धि कीचकों का वध किया था। ये ही वे हैं जिन्होंने आपके अन्तःकक्ष में बहुत से व्याघ्र, भालू और सूअरों को मारा था॥4-5॥
 
These are the ones who killed the demons named Krodhavash on the Gandhamadana mountain and brought the divine fragrant lotus for Draupadi. ​​These are the Gandharvas who killed the evil-minded Keechakas. They are the ones who killed many tigers, bears and boars in your inner chamber.॥ 4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)