Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.71.16: राजा युधिष्ठिर के पास माद्री के जुड़वाँ पुत्र नकुल-सहदेव बैठे हैं, जो इन्द्र और उपेन्द्र के समान श्रेष्ठ पुरुष हैं। सम्पूर्ण मानव जगत में ऐसा कोई नहीं है जो उनके रूप, बल और आचरण की बराबरी कर सके। 16॥ | mahabharat अध्याय 4.71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राज्ञ: समीपे पुरुषोत्तमौ तु
यमाविमौ विष्णुमहेन्द्रकल्पौ।
मनुष्यलोके सकले समोऽस्ति
ययोर्न रूपे न बले न शीले॥ १६॥
अनुवाद
राजा युधिष्ठिर के पास माद्री के जुड़वाँ पुत्र नकुल-सहदेव बैठे हैं, जो इन्द्र और उपेन्द्र के समान श्रेष्ठ पुरुष हैं। सम्पूर्ण मानव जगत में ऐसा कोई नहीं है जो उनके रूप, बल और आचरण की बराबरी कर सके। 16॥
Sitting near King Yudhishthir are Nakul-Sahdev, twin sons of Madri, both the best men like Indra and Upendra. There is no one in the entire human world who can match his form, strength and behavior. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥