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mahabharat 4.71.14: और जो मतवाले हाथी के समान चलता है, जिसका सुन्दर शरीर तपे हुए सोने के समान है, जिसके कंधे चौड़े और मोटे हैं, जिसकी भुजाएँ बड़ी और भारी हैं, वह भीमसेन है। उसे ध्यान से देखो ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 4.71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.71.14 
अयं पुनर्मत्तगजेन्द्रगामी
प्रतप्तचामीकरशुद्धगौर:।
पृथ्वायतांसो गुरुदीर्घबाहु-
र्वृकोदर: पश्यत पश्यतैनम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
और जो मतवाले हाथी के समान चलता है, जिसका सुन्दर शरीर तपे हुए सोने के समान है, जिसके कंधे चौड़े और मोटे हैं, जिसकी भुजाएँ बड़ी और भारी हैं, वह भीमसेन है। उसे ध्यान से देखो ॥14॥
 
And the one who walks like a drunken elephant, whose fair body is like heated gold, whose shoulders are broad and thick, whose arms are large and heavy, is Bhimasena. Look at him carefully. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)