श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका राजसभामें जाकर विराटसे मिलना और वहाँ आदरपूर्वक निवास पाना  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  4.7.d11 
वैशम्पायन उवाच
(एवं तु राज्ञ: प्रथम: समागमो
बभूव मात्स्यस्य युधिष्ठिरस्य च।
विराटराजस्य हि तेन संगमो
बभूव विष्णोरिव वज्रपाणिना॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, "जनमेजय! इस प्रकार राजा युधिष्ठिर और राजा मत्स्य का प्रथम मिलन हुआ। जैसे भगवान विष्णु वज्रधारी इंद्र से मिले थे, वैसे ही राजा विराट का युधिष्ठिर से मिलन हुआ।"
 
Vaishampayana says- Janamejaya! In this way King Yudhishthira and King Matsyas met for the first time. Just like Lord Vishnu met Indra who held the thunderbolt, in the same way King Virata met King Yudhishthira.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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