श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका राजसभामें जाकर विराटसे मिलना और वहाँ आदरपूर्वक निवास पाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.7.5 
मन्त्रिद्विजान् सूतमुखान् विशस्तथा
ये चापि केचित् परित: समासते।
पप्रच्छ कोऽयं प्रथमं समेयिवान्
नृपोपमोऽयं समवेक्षते सभाम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजा ने अपने दाएँ-बाएँ बैठे हुए मन्त्रियों, ब्राह्मणों, सूत-मागधों, वैश्यों तथा दरबार के अन्य सभी सदस्यों से पूछा - 'ये लोग कौन हैं, जो पहली बार यहाँ आए हैं? ये राजा की भाँति मेरे दरबार को निहार रहे हैं।'॥5॥
 
The king asked the ministers, Brahmins, Suta-Magadhas, Vaishyas and all the other members of the court who were sitting on his right and left - 'Who are these people who have come here for the first time? They are gazing at my court like a king.'॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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