श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका राजसभामें जाकर विराटसे मिलना और वहाँ आदरपूर्वक निवास पाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.7.11 
गोत्रं च नामापि च शंस तत्त्वत:
किं चापि शिल्पं तव विद्यते कृतम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अपना कुल और नाम ठीक-ठीक बताओ और यह भी बताओ कि तुमने कौन-सी विद्या या कला में निपुणता प्राप्त की है॥ 11॥
 
‘Tell me your clan and name correctly. Also tell me which knowledge or art you have acquired proficiency in.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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