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श्लोक 4.7.11  |
गोत्रं च नामापि च शंस तत्त्वत:
किं चापि शिल्पं तव विद्यते कृतम्॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| अपना कुल और नाम ठीक-ठीक बताओ और यह भी बताओ कि तुमने कौन-सी विद्या या कला में निपुणता प्राप्त की है॥ 11॥ |
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| ‘Tell me your clan and name correctly. Also tell me which knowledge or art you have acquired proficiency in.॥ 11॥ |
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