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mahabharat 4.69.9: उस समय उसे देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मेरी जांघें कांपने लगीं; परंतु उस देवपुत्र ने सिंह के समान पराक्रमी दुर्योधन और उसकी सेना को अपने बाणों से व्यथित कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 4.69: राजा विराट और उत्तरकी विजयके विषयमें बातचीत   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 69: राजा विराट और उत्तरकी विजयके विषयमें बातचीत  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.69.9 
तं दृष्ट्वा रोमहर्षोऽभूदूरुकम्पश्च मारिष।
स तत्र सिंहसंकाशमनीकं व्यधमच्छरै:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उस समय उसे देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मेरी जांघें कांपने लगीं; परंतु उस देवपुत्र ने सिंह के समान पराक्रमी दुर्योधन और उसकी सेना को अपने बाणों से व्यथित कर दिया।
 
On seeing him at that time, my hair stood on end and my thighs began to tremble; but that son of the gods tormented the lion-like mighty Duryodhana and his army with his arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)