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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना
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श्लोक 30
श्लोक
4.68.30
अक्षानाहर सैरन्ध्रि कङ्क द्यूतं प्रवर्तताम्।
तं तथावादिनं दृष्ट्वा पाण्डव: प्रत्यभाषत॥ ३०॥
अनुवाद
"सैरन्ध्री! जाओ और पासे ले आओ। कंक! जुआ शुरू करो।" उन्हें ऐसा कहते देख पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर ने कहा-॥30॥
"Sairandhri! Go and bring the dice. Kank! Let the gambling begin." Seeing them say this, Pandava's son Yudhishthira said -॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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