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श्लोक 4.67.23  |
स शत्रुसेनामभिभूय सर्वा-
माच्छिद्य सर्वं च धनं कुरुभ्य:।
वैराटिरायान्नगरं प्रतीतो
बृहन्नलासारथिना प्रवीर:॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| समस्त शत्रु सेना को परास्त करके तथा कौरवों के समस्त पशुओं को छीनकर, विराटपुत्र उत्तर अपने सारथी बृहन्नला के साथ प्रसन्नतापूर्वक नगर की ओर चल पड़ा। |
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| Having defeated the entire enemy army and snatched away all the cattle from the Kauravas, the brave son of Virata, Uttar, along with his charioteer Brihannala, proceeded happily towards the city. |
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इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि उत्तरागमने सप्तषष्टितमोऽध्याय:॥ ६७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें उत्तरका आगमनविषयक सरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६७॥
[दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल २५ श्लोक हैं।] |
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