श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 67: विजयी अर्जुन और उत्तरका राजधानीकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  4.67.16-17 
वैशम्पायन उवाच
ततो निवृत्ता: कुरव: प्रभग्ना वशमास्थिता:।
हस्तिनापुरमुद्दिश्य सर्वे दीना ययुस्तदा॥ १६॥
पन्थानमुपसङ्गम्य फाल्गुनो वाक्यमब्रवीत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! तत्पश्चात कौरव युद्ध से भाग गए और विवश होकर लौट पड़े। उस समय वे सब लोग विनीत भाव से हस्तिनापुर की ओर चल पड़े। इधर अर्जुन नगर के मार्ग में आकर उत्तरा से बोले- 16-17॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! Thereafter, the Kauravas fled from the war and were forced to return. At that time, all of them started towards Hastinapur in a humble manner. Here Arjun came on the way to the city and said to Uttara - 16-17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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