वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! सव्यसाची अर्जुन द्वारा इस प्रकार सान्त्वना दिये जाने पर विराटकुमार उत्तर भीष्मजी द्वारा चारों ओर से सुरक्षित किये गये महारथियों की दुर्जेय सेना में घुस गये। 33॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! On thus being consoled by Savyasachi Arjuna, Viratakumar Uttara entered the formidable army of charioteers protected from all sides by Bhishmaji. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥