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mahabharat 4.60.3: पहले तुमने धर्म की उपेक्षा करके बहुत कठोर वचन कहे थे, परन्तु जो तुम करना चाहते हो, उसे मैं तुम्हारे लिए बहुत कठिन समझता हूँ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 4.60: अर्जुन और कर्णका संवाद तथा कर्णका अर्जुनसे हारकर भागना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 60: अर्जुन और कर्णका संवाद तथा कर्णका अर्जुनसे हारकर भागना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.60.3 
अवोच: परुषा वाचो धर्ममुत्सृज्य केवलम्।
इदं तु दुष्करं मन्ये यदिदं ते चिकीर्षितम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पहले तुमने धर्म की उपेक्षा करके बहुत कठोर वचन कहे थे, परन्तु जो तुम करना चाहते हो, उसे मैं तुम्हारे लिए बहुत कठिन समझता हूँ॥3॥
 
Earlier you had spoken very harsh words ignoring only Dharma, but I consider what you want to do to be very difficult for you. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)