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श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 60: अर्जुन और कर्णका संवाद तथा कर्णका अर्जुनसे हारकर भागना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.60.2 
सोऽद्य कर्ण मया सार्धं व्यवहृत्य महामृधे।
ज्ञास्यस्यबलमात्मानं न चान्यानवमंस्यसे॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे कर्ण! आज इस महासमर में मुझसे युद्ध करके तुम अपनी दुर्बलता को पूर्णतः स्वीकार कर लोगे और फिर कभी दूसरों का अपमान नहीं करोगे।
 
O Karna! Today, after fighting with me in this great battle, you will completely accept your weakness and will never insult others again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)