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mahabharat 4.58.3: अर्जुन बोले - सारथी! तुम्हारा कल्याण हो। रथ के ध्वजदण्ड में, जिसके ऊपर ध्वजाओं से सुसज्जित यह ऊँची स्वर्णमयी वेदी चमक रही है, आचार्य द्रोण की सेना है। मुझे वहाँ ले चलो॥3॥   |   mahabharat अध्याय 4.58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 58: अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.58.3 
अर्जुन उवाच
यत्रैषा काञ्चनी वेदी ध्वजे यस्य प्रकाशते।
उच्छ्रिता प्रवरे दण्डे पताकाभिरलङ्कृता।
अत्र मां वह भद्रं ते द्रोणानीकाय सारथे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - सारथी! तुम्हारा कल्याण हो। रथ के ध्वजदण्ड में, जिसके ऊपर ध्वजाओं से सुसज्जित यह ऊँची स्वर्णमयी वेदी चमक रही है, आचार्य द्रोण की सेना है। मुझे वहाँ ले चलो॥3॥
 
Arjun said - Charioteer! May you be blessed. In the chariot's flag pole above which this tall golden altar decorated with banners is shining, there is Acharya Drona's army. Take me there.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)