Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.57.6-7: मत्स्यराज के पुत्र, जो घुड़सवारी का रहस्य जानते थे, ने रथ की गति से कौरवों को व्याकुल कर दिया। वे समझ नहीं पा रहे थे कि रथ किस महारथी की ओर जा रहा है। विराटपुत्र पराक्रमी उत्तर को किसी का भय नहीं था। वह कृपाचार्य के रथ के पास गया और रथ सहित उनकी परिक्रमा की। फिर उसने रथ को अपने सामने रोक लिया और वहीं खड़ा हो गया। 6-7। | mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मत्स्यराज के पुत्र, जो घुड़सवारी का रहस्य जानते थे, ने रथ की गति से कौरवों को व्याकुल कर दिया। वे समझ नहीं पा रहे थे कि रथ किस महारथी की ओर जा रहा है। विराटपुत्र पराक्रमी उत्तर को किसी का भय नहीं था। वह कृपाचार्य के रथ के पास गया और रथ सहित उनकी परिक्रमा की। फिर उसने रथ को अपने सामने रोक लिया और वहीं खड़ा हो गया। 6-7।
The son of the King of Matsyas, who knew the secret of horse-riding, bewildered the Kauravas with the movement of the chariot. They could not know which great warrior the chariot wanted to go to. The mighty Uttara, the son of Virata, had no fear from anyone else. He went near the chariot of Krupacharya and circumambulated him with the chariot. Then he stopped the chariot in front of him and stood there. 6-7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥