Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 4.57.43: इसी बीच श्रेष्ठ योद्धा कुन्तीपुत्र धनंजय से भयभीत होकर वे रथहीन कृपाचार्य को बड़ी तेजी से ले गये।   |   mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  4.57.43 
तत: कृपमुपादाय विरथं ते नरर्षभा:।
अपजह्रुर्महावेगा कुन्तीपुत्राद् धनंजयात्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
इसी बीच श्रेष्ठ योद्धा कुन्तीपुत्र धनंजय से भयभीत होकर वे रथहीन कृपाचार्य को बड़ी तेजी से ले गये।
 
Meanwhile, fearing Dhananjay, son of Kunti, the best soldier, they took away the chariot-less Kripacharya with great speed.
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि उत्तरगोग्रहणे कृपापयाने सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें उत्तरगोष्ठकी गौओंके अपहरणके प्रसंगमें कृपाचार्यका पलायनसम्बन्धी सत्तावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)