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mahabharat 4.57.42: यह देखकर विराट के पुत्र उत्तर ने घोड़ों को दाहिनी ओर मोड़ दिया और यमकमण्डल से रथ को हाँकते हुए बाणों की वर्षा से उन समस्त योद्धाओं को रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  4.57.42 
ततो विराटस्य सुत: सव्यमावृत्य वाजिन:।
यमकं मण्डलं कृत्वा तान् योधान् प्रत्यवारयत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर विराट के पुत्र उत्तर ने घोड़ों को दाहिनी ओर मोड़ दिया और यमकमण्डल से रथ को हाँकते हुए बाणों की वर्षा से उन समस्त योद्धाओं को रोक दिया।
 
Seeing this, Uttara, son of Virata, turned the horses to the right and driving the chariot from the Yamakamandal, stopped all those warriors with a shower of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)