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mahabharat 4.57.31: इस प्रकार धनुष कट जाने पर प्रतापी कृपाचार्य ने पाण्डुपुत्र अर्जुन पर वज्र के समान उग्र रथशक्ति का प्रयोग किया ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  4.57.31 
स च्छिन्नधनुरादाय रथशक्तिं प्रतापवान्।
प्राहिणोत् पाण्डुपुत्राय प्रदीप्तामशनीमिव॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार धनुष कट जाने पर प्रतापी कृपाचार्य ने पाण्डुपुत्र अर्जुन पर वज्र के समान उग्र रथशक्ति का प्रयोग किया ॥31॥
 
In this way, after the bow was cut, the glorious Kripacharya used the fiery chariot power like a thunderbolt on Pandu's son Arjun. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)