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mahabharat 4.57.28: कवच से मुक्त होने पर कृपाचार्य का शरीर ऐसा सुन्दर लगने लगा जैसे समय आने पर केंचुली उतारने पर साँप का शरीर सुन्दर हो जाता है ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.57.28 
तस्य निर्मुच्यमानस्य कवचात् काय आबभौ।
समये मुच्यमानस्य सर्पस्येव तनुर्यथा॥ २८॥
 
 
अनुवाद
कवच से मुक्त होने पर कृपाचार्य का शरीर ऐसा सुन्दर लगने लगा जैसे समय आने पर केंचुली उतारने पर साँप का शरीर सुन्दर हो जाता है ॥28॥
 
After being freed from the armour, Kripacharya's body looked as beautiful as a snake's body looks after shedding its skin in due course of time. ॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)