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mahabharat 4.57.24: कृपाचार्य को अपने स्थान से गिरा हुआ देखकर शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले कुरुनन्दन अर्जुन ने अपने अभिमान की रक्षा करते हुए उन पर बाणों का प्रहार नहीं किया॥24॥   |   mahabharat अध्याय 4.57: कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.57.24 
च्युतं तु गौतमं स्थानात् समीक्ष्य कुरुनन्दन:।
नाविध्यत् परवीरघ्नो रक्षमाणोऽस्य गौरवम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कृपाचार्य को अपने स्थान से गिरा हुआ देखकर शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले कुरुनन्दन अर्जुन ने अपने अभिमान की रक्षा करते हुए उन पर बाणों का प्रहार नहीं किया॥24॥
 
Seeing Kripacharya fallen from his place, Kurunandan Arjuna, the destroyer of enemy warriors, protecting his pride, did not attack him with his arrows. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)